dile e naadan

अब और बर्दास्त नहीं होता

हम ही क्यों बर्दास्त  करें क्या हमारा ही ठेका है बर्दास्त करने का, ज़ब बीवी को रखना ही नहीं आता है तो शादी ही क्यों करते हो, क्यों किसी की जिंदगी बर्बाद करते हो, सास को वहु चाहिए और लड़के को एक काम वाली पर क्यों। क्यों करें हम काम क्या तुमने खरीद लिया है हमें। शादी के बाद ससुराल वालों का सारा काम करें बहु तो कर्तव्य है वही लड़के की वारी आय तो क्यों कहा चला जाता है कर्तव्य, क्यों लड़के का कर्तव्य नी हो सकता ससुराल वालों के प्रति। क्यों सिर्फ लड़की ही बर्दास्त करें सबकुछ ,सारा काम भी करें लड़की और जरा सी गलती पे दुनिया जँहा की बाते भी सुने लड़की। पर क्यों। अरे जब तुम उस लड़की को उसके हक़ की इज्जत नहीं दे सकते तो क्यों करते हो शादी, अरे क्यों करते हो किसी की बेटी की जिंदगी बर्बाद क्यों लेते हो दहेज़ शादी के नाम पे। क्यों किसी की बेटी के जाज्वातों से खेलते हो। क्यों तोड़े हम अपने मा बाप भाई बहन से नाते तुम्हारे कहने से, होते कौन हो हमारे मा बाप भाई बहन से नाते तुड़ाने बाले। दहेज़ लेकर शादी करके दुनिया को दिखाते हो हमने महान काम कर दिया किसी की बेटी को ब्याह कर। तुम वो फ़क़ीर हो शादी के नाम पर बेटी को भी ले जाते हो और दहेज़ भी। थू है तुमपर और तुम जैसी सोच रखने वालो पर।

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Asif Khan

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