भाग्य बड़ा या कर्म (एक बेहतरीन कहानी)

वक्त से लड़कर जो नसीब बदल दे,इंसान वही जो अपनी तकदीर बदल दे | 

कल क्या होगा कभी न सोचो,क्या पता कल वक्त खुद अपनी तस्वीर बदल दे | | 

भाग्य बड़ा या कर्म ये सवाल सभी के मन में लगभग आता ही है ,गीता में भगवान श्री कृष्ण अर्जुन को कर्म करने का उपदेश देते हैं | भगवान कृष्ण अर्जुन से कहते हैं की राज्य तुम्हारे भाग्य में है की नहीं ये बाद की बात है पर तुम्हे पहले युद्ध तो लड़ना ही पड़ेगा,अर्थात कर्म तो करना ही पड़ेगा |

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एक कहानी है जिसके अंदर बहुत बड़ी सीख छिपी है 

एक जंगल के दोनों और अलग अलग राजाओं का राज्य था,और जंगल में एक महात्मा रहते थे | दोनों राजा उन्हें गुरु की तरह मानते थे | उसी जंगल के बीचोबीच एक नदी बहती थी और उस नदी को लेकर दोनों राज्य में अक्सर झगड़े होते थे | एक बार तो बात बिगड़ते बिगड़ते युद्ध तक आ पहुंची | कोई भी राजा सुलह को तैयार नहीं था | युद्ध तो निश्चित ही था |

दोनों राजाओं ने महात्मा के पास जाकर आशीर्वाद लेने का निश्चय किया | पहला राजा जब आशीर्वाद लेने पहुंचा तो महात्मा ने उससे कहा की “तुम्हार भाग्य में जीत नहीं दिखती ” आगे ईश्वर की मर्ज़ी | यह सुनकर राजा पहले तो थोड़ा विचलित हुआ फिर उसने सोचा की यदि हारना ही है तो पूरी ताकत से लड़ेंगे और हार नहीं मानेगे | यदि हार भी गए तो हार को दूसरों के लिए उदाहरण बना देंगे |

दूसरा राजा भी आशीर्वाद लेने महात्मा के पास गया | महात्मा ने कहा “भाग्य तो तेरे पक्ष में ही लगता है | राजा यह सुनकर ख़ुशी से भर गया | वापस लौटा तो इतना निश्चिन्त जैसे की उसने युद्ध जीत ही लिया हो | युद्ध का दिन आया दोनों तरफ से विगुल बजा | एक तरफ से सेना यह सोचकर लड़ रही थी की चाहे किस्मत में हार हो पर हम हार नहीं मानेंगे |

और दूसरी तरफ की सेना यह सोचकर लड़ रही थी की जीतना तो हमें ही तो घबराना कैसा ?\

लड़ते लड़ते दूसरे राजा के घोड़े की नाल भी निकल गयी | घोडा लड़खड़ाने लगा ,पर राजा ने ध्यान ही नहीं दिया और यह सोचा की जब जीत भाग्य में है ही तो किस बात की चिंता | पर कुछ ही देर बाद घोडा लड़खड़ा कर गिर गया और राजा दुश्मन के हार पड़  गया और उसकी हार हो गयी |

युद्ध के निर्णय के बाद महात्मा भी  वहां आ गए,और दोनों ही राजाओ को यह जानने की जिज्ञासा थी की आखिर भाग्य का लिखा बदल कैसे गया,उन्होंने महात्मा से प्रशन किया | महात्मा ने मुस्कुरा कर उत्तर दिया,राजन भाग्य में लिखा नहीं बदला वो अपनी जगह बिलकुल सही है | लेकिन तुम लोग बदल गए हो | उसने जीतने वाले राजा की ओर इशारा करते हुए कहा अब आप को ही देखो राजन संभावित हार को सुनकर आपने दिन रात एक कर दिया | सब कुछ भूल कर हर बात की तैयारी की जबकि पहले आपकी योजना सेनापति के बल पर युद्ध लड़ने की थी |

और आप राजन,महात्मा ने बंदी वाले राजा से कहा | आपने तो युद्ध से पहले ही जश्न मनाना आरम्भ कर दिया था | आपने तो अपने घोड़े की नाल तक का ख्याल नहीं रखा फिर इतनी बड़ी सेना को कैसे संभाल पाते | हुआ वही जो होना लिखा था भाग्य नहीं बदला परन्तु जिनके भाग्य में जो लिखा था उन्होंने ही अपना व्यक्तित्व बदल लिया,फिर बेचारा भाग्य क्या करता ?

दोस्तों भाग्य लोहे की तरह वहीँ खींचकर जाता है जहाँ कर्म का चुंबक हो | हम भाग्य के आदी नहीं है हम स्वम् भाग्य के निर्माता है | हमने जो भी कर्म किये वो संचित कर्मफल ही  भाग्य है | कुछ परिस्थितियों पर हमारा वश नही चलता,किसी अच्छे घर में पैदा हो जाना यह हमारे वशकी बात नहीं | हम टूटकर बिखर भी सकते हैं और टूटकर संवर भी सकते है | तो दोस्तों हमें अच्छे ही कर्म करने चाहिए जिससे हमें फल भी अच्छा मिले |

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Asif Khan

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