बायोग्राफी ए.पी.जे अब्दुल कलाम

ए.पी.जे अब्दुल कलाम  अबुल पकिर जैनुलआब्दीन अब्दुल कलाम  के नाम से भी जाने जाते है|जिनका जन्म 15 अक्टूबर 1931 को हुआ और निधन 27 जुलाई 2015 को हुआ| इन्हे ‘मिसाइल मैन’ और ‘जनता के राष्ट्रपति’ के नाम से जाना जाता है| विज्ञान की दुनिया में चमत्कारिक प्रदर्शन के कारण ही डॉ. ए.पी.जे अब्दुल कलाम के लिए राष्ट्रपति भवन के द्वार स्वतः ही खुल गए थे|इन्होने 1974 में भारत द्वारा पहले मूल परमाणु परीक्षण के बाद से दूसरी 1998 में भारत के पोखरान में अहम भूमिका निभाई| कलाम सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और भारतीय राष्ट्रिय कांग्रेस दोनों के समर्थन के साथ 2002 में भारत के राष्ट्रपति चुने गये|

प्रारम्भिक जीवन

15 अक्टूबर 1931 को रामेशवरम,तमिल नाडु में हुआ था| उनका जन्म एक मुस्लिम परिवार में हुआ| इनके पिता जैनुलब्दीन न ज्यादा पढ़े लिखे थे,न पैसे वाले थे| अब्दुल कलाम का परिवार एक साथ संयुक्त रहता था|इनके घर में तीन परिवार रहा करते थे| इनके पिता मछुआरों को नाव किराये पर दिया करते थे|अब्दुल कलाम के जीवन में उनके पिता का बहुत योगदान रहा है| अब्दुल कलम के पिता ने उन्हें अनपढ़ होने के बावजूद बहुत कुछ सिखाया जिससे उन्हें काफी सराहना मिली|

अब्दुल कलाम ने अपनी शिक्षा को महत्व देते हुए अखबार बांटने का काम आरम्भ किया| जिससे वे अपनी पढ़ाई पूरी कर सके और अपने पिता के काम में हाथ बटा सकें| 1950 में कलाम ने मद्रास इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी  से अंतरिक्ष विज्ञान में ग्रेजुएशन की उपाधि प्राप्त की|ग्रेजुएशन होने के बाद उन्होंने होवरक्राफ्ट परियोजना पर काम आरम्भ किया| जिसके लिए उन्होंने भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं  विकास संसथान में प्रवेश लिया| 1962 में वे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान में कई सफलतापूर्वक परियोजनाएं में अपनी भूमिका निभाई|

वैज्ञानिक जीवन

1962 में वे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन से जुड़े| 1980 में इन्होने रोहिणी उपग्रह को पृथ्वी की कक्षा के निकट स्थापित किया|इस प्रकार भारत भी अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष क्लब का सदस्य बन गया| इसरो को इतने बड़े परवान पर चढ़ाने का श्रेय भी इन्ही को जाता है| इसी प्रकार पोखरण में दूसरी बार परमाणु परीक्षण भी परमाणु ऊर्जा के साथ किया| इस प्रकार भारत ने परमाणु हथियार की क्षमता प्राप्त करने में सफलता प्राप्त की| यह भारत सरकार के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार भी रहे हैं| 1982 में वे वापस भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संस्थान में निदेशक के तौर पर आये,उन्होंने अपना सारा ध्यान ‘गाइडेड मिसाइल’ की तरफ केंद्रित किया|

वैसे कलाम राजनितिक  छेत्र के व्यक्ति नहीं थे| लेकिन राष्ट्रवादी सोच और राष्ट्रपति बनने के बाद भारत की कल्याण नीतियों के कारण इन्हे राजनितिक दृष्टि से सम्पन्न माना जाता है| एक पुस्तक है ‘इंडिया 2020’ जिसमे इन्होने अपने दृष्टिकोण के बारे में दर्शाया है| परमाणु हथियारों के छेत्र में यह भारत को सुपरपावर बनाने की बात सोचते थे|वह विज्ञान के अन्य क्षेत्रों में भी तकनीकी विकास चाहते थे। कलाम का कहना था कि ‘सॉफ़्टवेयर’ का क्षेत्र सभी वर्जनाओं से मुक्त होना चाहिए ताकि अधिकाधिक लोग इसकी उपयोगिता से लाभांवित हो सकें। ऐसे में सूचना तकनीक का तीव्र गति से विकास हो सकेगा। वैसे इनके विचार शांति और हथियारों को लेकर विवादास्पद हैं।

राष्ट्रपति पद से मुक्ति के बाद

कार्यालय छोड़ने के बाद, कलाम एक विजिटिंग प्रोफेसर बन गए | वे कई संस्थानों में सहायक बन गए और भारत भर में कई अन्य शैक्षणिक इंजीनियरिंग के प्रोफेसर बन गए| मई 2012 में, कलाम ने भारत के युवाओं के लिए एक कार्यक्रम ,भ्रष्टाचार को हराने के एक केंद्रीय विषय के साथ, “मैं आंदोलन को क्या दे सकता हूँ” का शुभारंभ किया।उन्होंने यहाँ तमिल कविता लिखने और वेंनयी नामक दक्षिण भारतीय स्ट्रिंग वाद्य यंत्र को बजाने का भी आनंद लिया।

2011 में आई हिंदी फिल्म आई एम कलाम में, एक गरीब लेकिन उज्ज्वल बच्चे पर कलाम के सकारात्मक प्रभाव को चित्रित किया गया। उनके सम्मान में वह बच्चा छोटू जो एक राजस्थानी लड़का है खुद का नाम बदल कलाम रख लेता है।2011 में, कलाम की कुडंकुलुम परमाणु संयंत्र पर अपने रुख से नागरिक समूहों द्वारा आलोचना की गई। इन्होंने ऊर्जा संयंत्र की स्थापना का समर्थन किया। इन पर स्थानीय लोगों के साथ बात नहीं करने का आरोप लगाया गया।

निधन

27 जुलाई 2015 की शाम अब्दुल कलाम भारतीय प्रबंधन संस्थान शिलॉन्ग में ‘रहने योग्य ग्रह’ पर एक व्याख्यान दे रहे थे जब उन्हें जोरदार दिल का दौरा पड़ा और ये बेहोश हो कर गिर पड़े।लगभग 6:30 बजे गंभीर हालत में इन्हें बेथानी अस्पताल में आईसीयू में ले जाया गया और दो घंटे के बाद इनकी मृत्यु की पुष्टि कर दी गई।

अस्पताल के सीईओ जॉन साइलो ने बताया कि जब कलाम को अस्पताल लाया गया तब उनकी नब्ज और ब्लड प्रेशर साथ छोड़ चुके थे। अपने निधन से लगभग 9 घण्टे पहले ही उन्होंने ट्वीट करके बताया था कि वह शिलॉन्ग आईआईएम में लेक्चर के लिए जा रहे हैं| 

कलाम अक्टूबर 2015 में 84 साल के होने वाले थे। मेघालय  के राज्यपाल वी.षड्मुखनाथन अब्दुल कलाम के हॉस्पिटल में प्रवेश की खबर सुनते ही सीधे अस्पताल में पहुँच गए। बाद में षडमुखनाथन ने बताया कि कलाम को बचाने की चिकित्सा दल की कोशिशों के बाद भी शाम 7:45 पर उनका निधन हो गया।मृत्यु के तुरंत बाद कलाम के शरीर को भारतीय वायु सेना के हेलीकॉप्टर से शिलॉन्ग  से गुवाहटी लाया गया।

जहाँ से अगले दिन 28 जुलाई को पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम का पार्थि‍व शरीर मंगलवार दोपहर वायुसेना के विमान सी-130जे हरक्यूलिस से दिल्ली लाया गया। लगभग 12:15 पर विमान पालम हवाईअड्डे पर उतरा। सुरक्षा बलों ने पूरे राजकीय सम्मान के साथ कलाम के पार्थिव शरीर को विमान से उतारा।वहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी , राष्ट्रपति प्रणव मुख़र्जी , दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल व तीनों सेनाओं के प्रमुखों ने इसकी अगवानी की और कलाम के पार्थिव शरीर पर पुष्पहार अर्पित किये।

इसके बाद तिरंगे में लिपटे कलाम के पार्थि‍व शरीर को पूरे सम्मान के साथ, एक गन कैरिज में रख उनके आवास 10 राजाजी मार्ग पर ले जाया गया।यहाँ पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी , राहुल गाँधी  और उत्तर प्रदेश  के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव  सहित अनेक गणमान्य लोगों ने इन्हें श्रद्धांजलि दी। भारत सरकार ने पूर्व राष्ट्रपति के निधन के मौके पर उनके सम्मान के रूप में सात दिवसीय राजकीय शोक की घोषणा की।30 जुलाई 2015 को पूर्व राष्ट्रपति को पूरे सम्मान के साथ रामेश्वरम के पी करूम्बु ग्राउंड में दफ़ना दिया गया। 

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Asif Khan

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