Biography of Albert Einstein (in hindi)

अल्बर्ट आइंस्टीन  एक महान  सैद्धांतिक भौतिकविद  थे जो General Theory of Relativity (E = mc2)  के लिए जाने जाते हैं। उन्हें खासकर प्रकाश-विद्युत  की खोज के लिए नोबेल पुरुष्कार  प्रदान किया गया।आइंस्टीन ने 300 से अधिक वैज्ञानिक शोध-पत्रों का प्रकाशन किया। 5 दिसंबर 2014 को विश्वविद्यालयों और अभिलेखागारो ने आइंस्टीन के 30,000 से अधिक अद्वितीय दस्तावेज एवं पत्र की प्रदर्शन की घोषणा की हैं। आइंस्टीन के बौद्धिक उपलब्धियों और अपूर्वता ने “आइंस्टीन” शब्द को “बुद्धिमान” का पर्याय बना दिया है।

अल्बर्ट आइंस्टीन की बचपन और शिक्षा

अल्बर्ट का जन्म जर्मनी में 14 मार्च,1879 में हुआ| उनके पिता एक इंजीनियर और सेल्समेन थे| उनकी माता पोलीन आइंस्टीन थी| आइंस्टीन को बचपन से ही पढ़ने का शौक था इसीलिए वे अपनी क्लास में हमेशा अव्वल आते थे| 1880 में उनका परिवार म्यूनिख चला गया वहाँ  जाकर उनके पिता और चाचा ने एक इलेक्ट्रिसिटी की कंपनी खोली| जिससे वे जो भी सामान न पाए उसे मेले बेच के अपनी कंपनी को बढ़ा सके परन्तु ऐसा नही हुआ और उनको बहुत नुक्सान का सामना करना पड़ा|

एक बार आइंस्टीन ने अपने गुरु से पूछा की विकास करने के लिए क्या करना चाहिए ?

उनके गुरु ने उत्तर दिए की अभ्यास ही सफलता की कुंजी है | इस मंत्र को आइंस्टीन ने अपने दिमाग में बिठा लिया और इसको मूलमंत्र का रूप दिया| और उन्होंने खुद से वादा किया की वे एक दिन अभ्यास करके सफल  होकर दिखाएंगे| गुरु मंत्र को गाँठ बाँध कर आइंस्टाइन सफलता की सीढी चढते रहे। आर्थिक स्थिति कमजोर होने की वजह से आगे की पढाई में थोङी समस्या हुई। परन्तु लगन के पक्के आइंस्टाइन को ये समस्या निराश न कर सकी। उन्होने ज्युरिक पॉलिटेक्निक कॉलेज में दाखिला ले लिया। शौक मौज पर वे एक पैसा भी खर्च नहीं करते थे, फिर भी दाखिले के बाद अपने खर्चे को और कम कर दिये थे।

Theory of Relativity की खोज

ज्युरिक कॉलेज में अपनी कुशाग्र बुद्धी जिसे उन्होने अभ्यास के द्वारा अर्जित किया था, के बल पर जल्दी ही वहाँ के अध्यापकों को प्रभावित कर सके। एक अध्यापक ‘मिकोत्सी’ उनकी स्थीति जानकर आर्थिक मदद भी प्रारंभ कर दिये थे। शिक्षा पूरी होने पर नौकरी के लिये थोङा भटकना पङा तब भी वे निराशा को कभी पास भी फटकने नहीं दिये। बचपन में उनके माता-पिता द्वारा मिली शिक्षा ने उनका मनोबल हमेशा बनाए रखा। उन्होने सिखाया था कि – “एक अज्ञात शक्ति जिसे ईश्वर कहते हैं, संकट के समय उस पर विश्वास करने वाले लोगों की अद्भुत सहायता करती है।“

गुरु का दिया मंत्र और प्रथम गुरु माता-पिता की शिक्षा, आइंस्टीन को प्रतिकूल परिस्थिती में भी आगे बढने के लिये प्रेरित करती रही। उनके विचारों ने एक नई खोज को जन्म दिया जिसे सापेक्षतावाद का सिद्धान्त (Theory of Relativity; E=mc^2) कहते हैं। इस सिद्धानत का प्रकाशन उस समय की प्रसिद्ध पत्रिका “आनलोन डेर फिजिक” में हुआ। पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों और बुद्धीजीवियों पर इस लेख का बहुत गहरा असर हुआ। एक ही रात में आइंस्टीन विश्वविख्यात हो गये। जिन संस्थाओं ने उन्हे अयोग्य कहकर साधारण सी नौकरी देने से मना कर दिया था वे संस्थाएं उन्हे निमंत्रित करने लगी। ज्युरिक विश्वविद्यालय से भी निमंत्रण मिला जहाँ उन्होने अध्यापक का पद स्वीकार कर लिया।

अल्बर्ट आइंस्टीन की कुछ घटनाएं

एक खोज में अखबार के कॉलम से ये जानने को मिला की आइंस्टीन को अमेरिका में इतनी अच्छी तरह से जाना जाता था कि लोग उन्हें सड़क पर रोक कर उनके दिए सिद्धांत की व्याख्या पूछने लगते थे। आखिरकार उन्होंने इस निरंतर पूछताछ से बचने का एक तरीका निकाला। वे उनसे कहते की “माफ कीजिये! मुझे लोग अक्सर प्रोफेसर आइंस्टीन समझते हैं पर वो मैं नहीं हूँ।” आइंस्टीन कई उपन्यास, फिल्मों, नाटकों और संगीत का विषय या प्रेरणा रहे हैं। 

“ एक बार बहुत तेज बारिश हो रही थी। अल्बर्ट आइंस्टीन अपनी हैट को बगल में दबाए जल्दी-जल्दी घर जा रहे थे। छाता न होने के कारण भीग गये थे। रास्ते में एक सज्जन ने उनसे पूछा कि – “ भाई! तेज बारिश हो रही है, हैट से सिर को ढकने के बजाय तुम उसे कोट में दबाकर चले जा रहे हो। क्या तुम्हारा सिर नहीं भीग रहा है?

 

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Asif Khan

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