Dhoka shayari in Hindi

Dhoka Shayari in Hindi

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इन्सान कम थे क्या.. जो अब मोसम भी धोखा देने लगे…

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समझ लेते हैं हम उनकी दिल की बात को,
वो हमें हर बार धोका देते है,
लेकिन हम भी मजबूर हैं दिल से,
जो उन्हें बार बार मौका देते हैं…!
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मत पूछ कैसे गुज़र रही है ज़िन्दगी, ज़िन्दगी ऐसे गुज़र रही है जैसे गुज़र ही नहीं रही?
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फ़ासला नज़रों का धोखा भी तो हो सकता है
वो मिले या न मिले हाथ बढा़ कर देखो…
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दिल धोखे में है , और धोखेबाज दिल में …!!
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तेरी दोस्ती ने दिए सुकून इतना,
कि तेरे बाद कोई भी अच्छा न लगे,
तुझे करनी हो बेवफाई तू इस अदा से करना,
कि तेरे बाद कोई भी बेवफा न लगे…!!!
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मोहब्बत जितनी मिली सारी बाँट दी दुनिया वालों को ,

जब मैंने झोली फैलाई तो किसी ने दर्द के सिवा कुछ न दिए
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मुकद्दर मे रात की नींद मुनासिब नहीं तो क्या हुआ,,
हम भी मुकद्दर को धोखा दे कर दिन मे सो जाते है.

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हैरान हूँ तुम्हारे “हसरतों” पर “मैं”,,,,, !! हर चीज माँगी तुमने “मुझसे” …”मुझे” छोड़कर …!!

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अनजाने में दिल गँवा बैठे
इस प्यार में कैसे धोखा खा बैठे
उनसे क्या गिला करे, भूल तो हमारी थी
जो बिना दिल वालों से दिल लगा बैठे

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उससे में तब ही याद आता हु जब उसके पास कोई नहीं होता

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हराकर कोई जान भी ले ले,
मुझे मंजुर है,.. पर…….
धोखा देने वालों को मै दुबारा मौका नही देता!

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खाए है लाखो धोखे, एक धोखा और से लेंगे. तू लेजा अपनी डोली को, हम अपनी अर्थी को बारात कह लेंगे..

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पल पल उसका साथ निभाते हम
एक इशारे पर दुनिया छोड़ जाते हम
समंदर के बिच में पहोच कर फरेब किया उसने
वो कहते तो किनारे पर ही डूब जाते हम

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में क्यों पुकारू उससे की लौट आओ ,
क्या उसको खबर नहीं है की कुछ नहीं है मेरे पास उसके सिवा,

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कौन है इस जहाँ मे जिसे धोखा नहीं मिला,
शायद वही है ईमानदार जिसे मौक़ा नहीं मिला…

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मैं उसका सबसे पसंदीदा खिलौना हूँ दोस्तों.. वो रोज़ जोड़ती है मुझे फिर से तोड़ने के लिए..

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उसने तोडा वो ताल्लुक़ जो हमारी हर बात से था
उसको दुःख न जाने मेरी किस बात से था
सिर्फ ताल्लुक़ रहा, लोगों की तरह वो भी
जो अच्छी तरह वाकिफ मेरी हर बात से था

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झूठ  बोलने से क्या फायदा ,
जब जाना ही था तो ,
बहाने बनाने की क्या ज़रूरत थी ,

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दर्द इतना था ज़िंदगी में कि धड़कन साथ देने से घबरा गयी!….
आंखें बंद थी किसी कि याद में ओर मौत धोखा खा गयी!….

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सज़दे कीजिये, या माँगिये दुआयें,,,, जो आपका है ही नही, वो आपका होगा भी नही.

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भगवान मुझे प्लीज ऐसे लोगो से मत मिलाओ जो सिर्फ अपना मतलब निकलना जानता हो |

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दिल्लगी थी उसे हमसे मोहब्बत कब थी
महफ़िल-ए-गैर से उन्हें फुर्सत कब थी
हम थे मोहब्बत में लूट जाने के काबिल
उसके वादों में वो हक़ीक़त कब थी

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इस कदर भूखा हूँ साहब,
कभी कभी धोखा भी खा लेता हूँ!

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जो जले थे हमारे लिऐ बुझ रहे है वो सारे दिये, कुछ अंधेरों की थी साजिशें कुछ उजालों ने धोखे दिये !!

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किसी के लिए रोना बेकार है अब तो , लोग तो अपना मतलब निकाल कर चले जाते है

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यू तो हर दिल में एक कशिश होती है
हर कशिश में एक ख्वाहिश होती है
मुमकिन नही सभी के लिए ताज महल बनाना
लेकिन हर दिल में एक मुमताज़ होती है |

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कुछ लुटकर, कुछ लूटाकर लौट आया हूँ,
वफ़ा की उम्मीद में धोखा खाकर लौट आया हूँ |

अब तुम याद भी आओगी, फिर भी न पाओगी,
हसते लबों से ऐसे सारे ग़म छुपाकर लौट आया हूँ |

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आखिर तूने दिखा ही दी अपनी औकात, जा तुझे आज़ाद करते है हम,

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मोहब्बत करने वालो मे भी अक्सर ये सिला देखा हे,
जिन्हे अपनी वफ़ा पे नाज़ था, उन्हे भी बेवफा देखा हे|

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सोचता हु जब तेरे बारे में , तो सिर्फ इक चीज़ मिली थी हमें तुझसे प्यार करने के बाद, और वो था सिर्फ धोका |

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हमने तो बेवफा के भी दिल से वफ़ा किया
इसी सादगी को देखकर सबने दगा किया
मेरी टिशनगी तो पी गयी हर जख्म के आँसू
गर्दिश मे आके हमने अपना घर बना लिया |

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ज़िंदगी में न जाने और कितने सितम मिलेंगे , मेरी गुज़ारिश है मेरे खुदा से के हम आपस में कब मिलेंगे|

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कैसी है यह हमारी तक़दीर,
हर तरफ दागा ही पाया है.
दिल मे तो है प्यार ही प्यार लेकिन,
हर तरफ बेवफाओ को ही पाया है|

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जिस नाम से मोहब्बत करते थे , अब तो उस नाम से हमें नफरत होने लगी है|

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इंनकार करते करते, इकरार कर बैठे,
हम तो एक बेवफा से प्यार कर बैठे| |

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मुहब्बत ज़िंदगी बदल देती है..
मिल जाए….तो भी..
ना मिले……..तो भी.. !

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ग़मों की बरसात समेटे बैठा हूँ , किसी बेवफा से धोखा खाया बैठा हूँ , जाने कब देगा उपरवाला मुझे मौत , खुदा के भरोसा आस लगाये बैठा हूँ

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शिकवा नहीं क तू भी बदल जायेगी , हमें तो मौसम ने बता दिए था , के तेरा हाल अब ठीक नहीं है| |

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Asif Khan

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