Life Lessons From Swami Vivekananda | Motivational Thoughts

दोस्तों आज की ये पोस्ट बहुत important और special  है क्योंकि आज मै बात करने जा रहा हूँ एक ऐसे इंसान के बारे में जिसने ऐसे ऐसे सिद्धांत दिए, जिसने पूरी इंडिया को बदल दिया ,कई देशो की सोच को बदल दिया और आज आपकी सोच भी बदल सकता है.

उस इंसान के followers की लिस्ट में ऐसे नाम हैं जिनको पूरी दुनिया follow करती है जैसे महात्मा गाँधी,रबीन्द्रनाथ टैगोर,जवाहरलाल नेहरू ,और ऐसे कई बड़े बड़े नाम उनके followers की लिस्ट में शामिल हैं. मै बात कर रहा हूँ स्वामी विवेकानंद के बारे में  ,वे दुनिया के लिए एक सन्यासी थे .लेकिन सन्यासी होने के वावजूद उन्होंने देश की तरक्की के बारे में सोचा .उन्होंने देश की youth को सोचने पर मजबूर कर दिया कैसे वे अपने अंदर छिपे potential को बहार निकाल सकते हैं,अपने लिए ,अपने परिवार के लिए ,अपने देश के लिए use कर सकते हैं.

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स्वामी विवेकानंद ने वेदों के ज्ञान को simple language में लोगो तक पहुँचाया .वो एक visionary थे उनको पता था आने वाले समय में दुनिया में क्या क्या परेशानियां आने वाली हैं.उन्होंने कई बुक्स लिखी जैसे की कर्म योग,भक्त योग,राज योग और जन्म योग.

मै चाहूंगा तीन बातें उनकी लाइफ के बारे में आपके साथ शेयर करूँ . 

1-Be Fearless (निडर)

स्वामी विवेकानंद बचपन से ही किसी भी बात को सुनकर नहीं मानते थे,वो उसको खुद देख कर,खुद एक्सपीरियंस करके मानते थे.

बचपन में वे अपने दोस्त के साथ एक बगीचे में खेलने जाते थे और पेड़ पर चढ़ जाते थे.अब उन दोनों को चोट न लग जाए इस कारण बच्चे के दादा जी ने कहा की इस पेड़ पर भूत रहता है और पेड़ पर चढ़ने वालों की गर्दन तोड़ देता है.ये बात सुनकर बच्चा घबरा गया और विवेकानंद बिलकुल भी नहीं डरे. उन्होंने तय कर लिया की वो इस बात की पूरी सच्चाई जानकर रहेंगे .

इसलिए एक रात वे चुपचाप उस पेड़ पर चढ़ गए और पूरी रात इंतज़ार किया की कोई भूत आता है या नही .जब कोई भूत नहीं आया तब उन्होंने अपने दोस्त से कहा की इस पेड़ पर कोई भूत नहीं है मैंने खुद देखा है .उनका मानना था की डर ही इंसान का सबसे बड़ा दुश्मन है जो सबको आगे बढ़ने से रोकता है ,इसलिए उन्होंने कहा था की अगर पाप जैसी कोई चीज़ है तो ये कहना एकमात्र पाप है-की मैं कमजोर हूँ या कोई और कमजोर है.

तो दोस्तों हममे से कितने लोग है जो कितना कुछ करना चाहते है ,हम सोसाइटी की परेशानियां सॉल्व करना चाहते हैं लेकिन ये डर रोक देता है की अगर ये न चला तो,क्या मुझे ये करना चाहिए,क्या मै इसमें सक्सेसफुल होंगा,अगर मै इसमें फेल हो गया,ये कम्फर्ट जोन हमे आगे नहीं बढ़ने देता .इसलिए इस कम्फर्ट को खत्म करना पड़ेगा वरना ये कम्फर्ट आपको खत्म कर देगा.

2-Believe in Yourself (खुद पर विश्वास)

‘लक्ष्य के लिए खड़े हो तो एक पेड़ की तरह,

गिरो तो एक बीज की तरह.

ताकि दोबारा उठ कर उस लक्ष्य के लिए फिर से जंग कर सको| | 

अपने गुरु से जो ज्ञान उन्होंने हासिल किया था उसको वो पूरी दुनिया में फैलाना चाहते थे,ये उनका मकसद था और इस मकसद के लिए वे लगे रहे.

स्वामी विवेकानंद को खुद पर हद से ज्यादा विश्वास था,बहुत बड़ी ताकत होती है खुद पर विश्वास. उन्होंने फैसला किया की 1883 में chicago में विश्व धर्म सम्मेलन में वो हिस्सा लेंगे. शिकागो पहुँचते ही स्वामी जी के आगे एक और बड़ी चुनौती आ  गयी की विश्व धर्म सम्मेलन 2 महीने आगे बढ़ गया था.अब उनके पास इतने पैसे नहीं थे की वो चिकागो में दो महीने गुज़र सके,उन्होंने कई रातें सड़कों पर गुजारी ,कई रातें भूखे पेट सोये. उनकी अलग अलग ड्रेसिंग स्टाइल से कई लोग उनका मज़ाक बनाते,तो कुछ लोग उनको मारने को दौड़ते. लेकिन कभी वो कमज़ोर नहीं पड़े वक्त से कभी नहीं हारे क्योंकि उनका लक्ष्य बहुत बड़ा था की भारत को पूरे विश्व के सामने वो सम्मान दिलवाना है जो वो deserve करता है.

विश्व धर्म सम्मेलन के मंच पर उन्होंने ऐसा भाषण दिया की सुनने वालों को हिंदुस्तान और हिंदुस्तान के इस महान संत की महानता पर फख्र होने लगा.पूरी दुनिया में ये स्पीच फेमस हुई और आज भी लोग इस स्पीच को पढ़ते हैं.

दोस्तों स्वामी विवेकानंद ने ये दिखा दिया की खुद पर अगर अटूट विश्वास हो न तो दुनिया की बड़ी से बड़ी ताकत भी तुम्हे रोक नहीं सकती.आपके पास तेल है,दिया है,बत्ती है लेकिन आप उसको जला नहीं सकते,क्योंकि उस दिए को जलाने के लिए चाहिए चिंगारी. इसी तरह से आपके पास plans है,ideas है , resources है, skills है लेकिन अगर विश्वास की चिंगारी नहीं होगी तो आपके ideas,plans,resources और skills सब कुछ बेकार  है.

अगर खुदपर भरोसा करोगे तभी खुदा भी तुम पर भरोसा करेगा 

3-Be The Man of Your Words (कथनी और करनी एक समान )

स्वामी विवेकानंद वो इंसान थे जिनकी कथनी और करनी में कोई अंतर् नहीं था.एक बार एक विदेशी महिला ने स्वामी जी से बोला की स्वामी जी मै आपसे शादी करना चाहती हूँ.स्वामी जी ने कहा ये कैसे मुमकिन है मै तो एक सन्यासी हूँ.उन्होंने कहा मै चाहती हूँ की मेरा आपके जैसा एक बेटा हो,और ऐसा तभी हो सकता है जब मैं आपसे शादी करूंगी.

स्वामी जी कहते हैं इस में क्या मुश्किल है मै तुम्हारा बेटा बन जाता हूँ.उस विदेशी महिला का सर respect से स्वामी जी के आगे झुक गया.

कई बार हम बिना जाने ऐसे फैसले ले लेते हैं जो हमे बाद में हानि पहुंचाते और हमे बाद में पछतावा होता है.इसलिए हमेशा फैसला लेते हो या बात जुबान से निकालते हो तो सोच समझकर लो.अगर एक बार फैसला ले लिया तो उस पर रहने की आदत डालो .

जितना हो सके तुमसे काम,उतनी ही खोलो जुबान 

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दोस्तों आप लोगो मेरी ये पोस्ट कैसी लगी आप मुझे कमेंट करके बता सकते है.

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Asif Khan

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