Rakesh Jhunjhunwala incredible story (in hindi)

कई बार हमारे मन में एक सवाल आता है की करोड़पति कैसे बने? तो सबसे पहले स्टॉक मार्केट की तरफ ध्यान जाता है|अगर स्टॉक मार्केट में लम्बे समय तक रहना है तो ज्यादा से ज्यादा पैसा कमाने की जरूरत होती है|जब लाखों करोड़ो रुपयों का नुक्सान होता है उसी तरह लाखों करोड़ों रुपयों का फायदा भी होता है जिसके कारण इंसान का इंटरेस्ट बना रहता है और वो ज्यादा से ज्यादा इनवेस्टमेंट करता है| स्टॉक मार्किट में कम्पनीज शेयर खरीदती और बेचती है |इस मार्केट में इन्वेस्टमेंट करने से लोग अकसर डरते है बहुत से लोग ऐसा मानते है की शेयर मार्केट ऐसा क्षेत्र है जहाँ लोग अपना पैसा बर्बाद करते है |

पर इसी भारतीय सोच को बदलने के लिए और इस क्षेत्र में काफी लोग नाम कमा रहे है,इनमे से एक है-राकेश झुनझुनवाला

कौन है राकेश झुनझुनवाला

राकेश झुंझुनवाला को शेयर बाजार का बादशाह कहा जाता है| क्योंकि काफी कम पैसों से उन्होंने अपने कॅरियर की शुरुआत की और कुछ सालों में अपनी मेहनत,बुद्धि  और लगन से काफी बड़ा व्यापार खड़ा कर लिया और आज उन्हें स्टॉक मार्केट में काम करने वाले लोग गुरु मानते है| राकेश झुनझुनवाला को इंडियन  वारेन बुफे के नाम से भी जाना जाता है| राकेश झुनझुनवाला एक भारतीय निवेशक और व्यापारी है। उन्होंने चार्टर्ड अकाउंटेंट की पढाई की है और उनकी कंपनी रेयर एंटरप्राइज को एक सहयोगी की तरह संभाल कर रखा है।

राकेश झुनझुनवाला भारत के शहर मुम्बई में ही बड़े हुए| उन्होंने सिडेन्हम कॉलेज से ग्रेजुएशन प्राप्त की और फिर उन्होंने चार्टेड अकाउंटेंट करने के लिए इंस्टिट्यूट में दाखिला लिया| वे बहुत सारी कम्पनीज में बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स रह चुकें है|

राकेश झुनझुनवाला का स्टॉक मार्केट में सफर

उनका कहना है कि मेरा बिज़नेस  मंत्र बहुत आसान है, “बाय राईट एंड होल्ड टाइट” यानी सही समय पर सही शेयर ख़रीदे और उसे जकड कर रखे।और उनका मानना है कि , शेयर बाज़ार में तेज़ी सबका फायदा होता है और मंदी में सबका नुकसान होता है। इसीलिए यह मायने नही रखता की  वैश्विक कुबेरों की सूचि में शामिल हुये या नही,केवल अपने गोल पर नज़र रखनी चाहिए|

राकेश झुनझुनवाला आज भारत में सबसे सफल इक्विटी निवेशकों में से एक है। उन्होंने स्टॉक मार्केट मे निवेश की शुरुआत 1985 मे 5000 रुपये  से की| उस समय सेंसेक्स 150 पर था| वे जानते थे की इतने पैसे मे वे स्टॉक मार्केट से लाभ नहीं उठा पायेंगे लेकिन जल्द ही उन्हें अपने भाई के क्लाइंट से 2.5 लाख रूपये  मिल गये उन्होंने उससे वादा किया था की उसको वे फिक्स्ड डिपाजिट से ज्यादा रेटर्न दिलायेंगे|  उन्होंने अपना पहला बड़ा लाभ 1986 में कमाया, जब उन्होंने तीन महीने पहले टाटा टी के 5000 शेयर जो की 43 रूपए मे ख़रीदे गए थे को 143 रूपए मे बेच दिया| 1986 से 1989 के बीच उन्होंने 20 से 25 लाख रुपये कमाये| उन्हें एहसास हुआ कि शेयर बाजार से बड़े पैसे कमाने के लिए ट्रेडिंग ही एकमात्र उपाए है|

झुनझुनवाला ने 2002-2003 मे टाइटन के 6 करोड़ शेयर 3 रुपये  की औसत से ख़रीदे|  इनकी कीमत अब 817 रुपय चल रही है| और उनके निवेश की वैल्यू बढ़कर 900 मिलियन डॉलर से अधिक पहुच गयी है और कंपनी मे उनकी हिस्सेदारी 8 प्रतिशत है|  2006 मे उन्होंने लूपिन को 150 रूपये मे ख़रीदा जो की अब 1100 के लेवल पर ट्रेड हो रहा है|  उन्होंने क्रिसिल के शेयर 200-300 रूपये के लेवल पर ख़रीदे जिनका मूल्य अब 1800 है|  वह अपने पोर्टफोलियो का प्रबंधन  उनकी निजी स्वामित्व वाली स्टॉक ट्रेडिंग फर्म RARE ENTERPRISES मे वे अपनी पत्नी के साथ भागीदार है और इस फर्म का नाम उनके नाम और पत्नी रेखा के नाम के पहले दो प्रारंभिक नामों से मिलकर बना है।

इनवेस्टमेंट फिलॉसॉफी ऑफ़ राकेश झुनझुनवाला

वह वही स्टॉक उठाते है जिसे वह महसूस करते है कि वे आगे उनसे विकास कर  पाएं। वह दीर्घकालिक निवेश में विश्वास करते है और मार्केट मे सरलता से उपलब्ध ज्ञान पर भरोसा करते है । उनका कहना है कि वह विकास कंपनी के नकदी प्रवाह को देखते हैं। उन्होंने ये मन है की गलतियों से मिली सीख ने उन्हे बेहतर निवेशक बनाया है|  उनका कहना है की वे गलत कंपनियों को चुनने के लिए भी कीमत चुकाते है। जब भी वे कंपनिया खरीदते है, तो उन्हें अपनाते है।झुनझुनवाला गलतियों से सीखने में भरोसा रखते हैं। वह अक्सर कहते है- ‘गलतियाँ आपके सीखने वाले दोस्त हैं। उनका विचार इन गलतियों को कम रखना है।

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Asif Khan

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