शाहरुख़ खान जीवनी | Shahrukh Khan Biography

शाहरुख़ खान जीवनी

शाहरुख़ ख़ान (जन्म 2 नवम्बर 1965), जिन्हें अक्सर शाहरुख ख़ान के रूप में श्रेय दिया जाता है और अनौपचारिक रूप में एसआरके नाम से सन्दर्भित किया जाता, एक भारतीय फ़िल्म अभिनेता है। अक्सर मीडिया में इन्हें “बॉलीवुड का बादशाह”, “किंग ख़ान”, “रोमांस किंग” और किंग ऑफ़ बॉलीवुड नामों से पुकारा जाता है। ख़ान ने रोमैंटिक नाटकों से लेकर ऐक्शन थ्रिलर जैसी शैलियों में 75 हिन्दी फ़िल्मों में अभिनय किया है।

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फिल्म उद्योग में उनके योगदान के लिये उन्होंने तीस नामांकनों में से चौदह फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार जीते हैं। वे और दिलीप कुमार  ही ऐसे दो अभिनेता हैं जिन्होंने साथ फ़िल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरूस्कार आठ बार जीता है। 2005 में भारत सरकार ने उन्हें भारतीय सिनेमा के प्रति उनके योगदान के लिए पद्म श्री  से सम्मानित किया।

प्रारम्भिक शिक्षा

ख़ान के माता पिता पठान  मूल के थे| उनके पिता ताज मोहम्मद ख़ान एक स्वतंत्रता सेनानी थे और उनकी माँ लतीफ़ा फ़ातिमा मेजर जनरल शाहनवाज़ ख़ान की पुत्री थी|

ख़ान के पिता हिंदुस्तान के विभाजन से पहले पेशावर के किस्सा कहानी बाज़ार से दिल्ली आए थे,हालांकि उनकी माँ रावलपिंडी से आयीं थी| ख़ान की एक बहन भी हैं जिनका नाम है शहनाज़ और जिन्हें प्यार से लालारुख बुलाते हैं|

 ख़ान ने अपनी स्कूली पढ़ाई दिल्ली के सेंट कोलम्बा स्कूल से की जहाँ वह क्रीड़ा क्षेत्र, शैक्षिक जीवन और नाट्य कला में निपुण थे| स्कूल की तरफ़ से उन्हें “स्वोर्ड ऑफ़ ऑनर” से नवाज़ा गया जो प्रत्येक वर्ष सबसे काबिल और होनहार विद्यार्थी एवं खिलाड़ी को दिया जाता था| इसके उपरांत उन्होंने हंसराज कॉलेज से अर्थशास्त्र  की डिग्री एवं जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की मास्टर्स डिग्री हासिल की|

वैवाहिक जीवन

शाहरूख एक ऐसे अभिनेता रहें हैं जिनके प्रशंसक हर उम्र और हर वर्ग के लोग हैं। खासकर, लड़कियां उनकी काफी दीवानी हैं लेकिन बावजूद इसके शाहरूख का किसी के साथ अफेयर या प्रेम संबंध नहीं रहा है। वे अपनी पत्‍नी के लिए हमेशा से वफादार रहे हैं और अपने परिवार से बेहद प्‍यार करते हैं।

अपने माता पिता के देहांत के उपरांत ख़ान 1991 में दिल्ली से मुम्बई आ गए| 1991 में उनका विवाह गौरी खान  के साथ हिंदू रीति रिवाज़ों से हुआ|उनकी तीन संतान हैं – एक पुत्र आर्यन , एक पुत्री सुहाना |व पुत्र अब्राहम।

करियर

शाहरूख के करियर की शुरूआत टेलीविजन से हुई थी। दिल दरिया, फौजी, सर्कस जैसे सीरियल्‍स से उन्‍होंने अपनी पहचान बनाईा उनके फिल्‍मी करियर की शुरूआत फिल्‍म ‘दीवाना’ से हुई थी जिसके लिए उन्‍हें सर्वश्रेष्‍ठ नवोदित अभिनेता का फिल्‍मफेयर पुरस्‍कार भी मिला था। उस समय यह फिल्‍म सुपरहिट हुई और इसी फिल्‍म ने शाहरूख को हिन्‍दी फिल्‍म इंडस्‍ट्री में स्‍थापित किया। इसके बाद शाहरूख ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और वे लगातार सफलता की सीढि़यों पर चढ़ते गए। धीरे धीरे वे आलोचकों के साथ साथ जनता की पसंद बन गए और लड़कियों के बीच तो काफी प्रसिद्ध हो गए।

प्रसिद्ध फिल्में

दीवाना, बाजीगर, डर, कभी हां कभी ना, करन अर्जुन, दिलवाले दुल्‍हनियां ले जाएंगे, चाहत, कोयला, यस बॉस, परदेस, दिल तो पागल है, दिल से, कुछ कुछ होता है, जोश, मोहब्‍बतें, कभी खुशी कभी गम, देवदास, कल हो न हो, मैं हूं ना, वीर जारा, डॉन, चक दे इंडिया, ओम शांति ओम, रब ने बना दी जोड़ी, माय नेम इज खान, रा.वन, डान 2, जब तक है जान, चेन्‍नई एक्‍सप्रेस, हैप्‍पी न्‍यू ईयर जैसी प्रसिद्ध फिल्‍मों से शाहरूख ने अपनी एक्टिंग का लोहा मनवाया।

अभिनय

1995 में उन्होंने आदित्य चोपड़ा  की पहली फ़िल्म “दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे ” में मुख्य भूमिका निभाई। यह फ़िल्म बॉलीवुड के इतिहास की सबसे सफल और बड़ी फिल्मों में से एक मानी जाती है। मुम्बई के कुछ सिनेमा घरों में यह 15  सालों से चल रही है।

1996  उनके लिए एक निराशाजनक साल रहा क्यूंकि उसमे उनकी सारी फिल्में असफल रहीं।1997  में उन्होंने यश चोपड़ा  की दिल तो पागल है , सुभाष घई  की परदेस  और अजीज मिर्ज़ा की यस बॉस  जैसी फिल्मों के साथ सफलता के क्षेत्र में फिर कदम रखा।

वर्ष  1998 में करण जोहर की बतौर निर्देशक पहली फ़िल्म कुछ कुछ होता  है  उस साल की सबसे बड़ी हिट घोषित हुई और ख़ान को चौथी बार फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरुस्कार  हासिल हुआ। इसी साल उन्हें मणि रत्नम  की फ़िल्म दिल से में अपने अभिनय के लिए फ़िल्म समीक्षकों से काफ़ी तारीफ़ मिली और यह फ़िल्म भारत के बाहर काफ़ी सफल रही।

अगला वर्ष उनके लिए कुछ ख़ास लाभकारी नही रहा क्यूंकि उनकी एक मात्र फ़िल्म, बादशाह  का प्रदर्शन स्मरणीय नही रहा और वह औसत व्यापार ही कर पायी| सन 2000  में आदित्य चोपड़ा  की मोहब्बतें  में उनके किरदार को समीक्षकों से बहुत प्रशंसा मिली

उस ही साल आई उनकी फ़िल्म जोश भी हिट हुई। उस ही वर्ष में ख़ान ने जूही चावला  और अजीज मिर्ज़ा  के साथ मिल कर अपनी ख़ुद की फ़िल्म निर्माण कम्पनी, ‘ड्रीम्ज़ अन्लिमिटिड’, की स्थापना की। इस कम्पनी की पहली फ़िल्म फिर भी दिल है हिंदुस्तानी , जिसमे ख़ान और चावला दोनों ने अभिनय किया, बॉक्स ऑफिस पे जादू बिखेरने में असमर्थ रही। 

ख़ान की दो फिल्में आई है -चक दे इंडिया  में ख़ान भारतीय महिला हॉकी टीम के कोच के किरदार में नज़र आते हैं जिनका लक्ष्य है भारत को विश्व कप दिलवाना। इस किरदार की लिये ख़ान को समीक्षकों से तो खासी प्रशंसा मिली ही है साथ ही साथ यह फ़िल्म एक विशाल हिट भी सिद्ध हुई है।

2007 की दूसरी फ़िल्म ओम शांति ओम में भी नज़र आए ये फराह ख़ान की शाहरुख़ ख़ान के साथ दूसरी फ़िल्म है। इसमें ख़ान ने दोहरी भूमिका निभाई। पहला किरदार ओम एक जूनियर कलाकार है और एक हादसे में मारा जाता है और दूसरा एक नामी अभिनेता ओम कपूर है। ये फ़िल्म भी 2007 की एक सफल फ़िल्म थी।

नामांकन और पुरस्कार 

खान ने फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरूस्कार -माई नेम इस खान,चक दे इंडिया ,स्वदेश ,देवदास ,कुछ कुछ होता है ,दिल तो पागल है ,दिलवाले दुल्हनियां ले जायेंगे ,बाज़ीगर  जैसी फिल्मों से हासिल किया |

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Asif Khan

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